जान एक वो है शर्माती सी जो .... पर पास मेरे क्यों कभी आती नहीं
एक जान मुझमे भी है कुछ तड़पती सी ..जो कम्बक्त क्यों कभी जाती नहीं .....
मिले इसको राहत कैसे कुछ पल ही सही ......ऐसा फिर क्यों एहसास वो जतलाती नहीं ....
खैर दर्द ही बन गए है वो जो अब की ..क्यों ये दर्द ही सही बन दवा असर दिखलाती नहीं
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