गर मै हु जो सर्द हवा का झोखा
तो तुम बन खुशबु मिल जाना मुझे कुछ इश तरह
दिशाओ को बेथोड जोर से हिलाता बहुगा जो मै
तुम उनको अपनी खुशबु से महकाते चलना
हु सर्द हवा का झोका जो
तुम बन खुशबु मुझे महकाते हमेशा मेरे साथ चलना
मै थक जाऊ कही ये वक़्त के थपडो से
शिथिल हो जाये मेरे अंग जो मन हार कर
आलिंगन कर मुझे बन सुधा मेरे मन मंदिर की
तुम अपने अधरों से मुझे जीवन पिलाते चलना
हु सर्द हवा का झोका जो मै
तुम बन खुशबु मुझे महकाते हमेशा मेरे साथ चलना
गर जो मेरे विचारो की ये धरा बन जाये
ये की नव विहान का मै सूरज अस्त हो जाये अगर
बन मेरी तुम किरण ले मेरे प्राणों की ज्वाला
ये धरा पर नित तुम उजालो को फैलाते रहना
हु सर्द हवा का झोका जो मै
तुम बन खुशबु मुझे महकाते हमेशा मेरे साथ चलना
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