Monday, December 27, 2010

बन खुशबु मुझे महकाते हमेशा मेरे साथ चलना

गर मै हु जो  सर्द हवा का झोखा
तो तुम बन खुशबु मिल जाना मुझे कुछ इश  तरह
दिशाओ को बेथोड जोर से हिलाता बहुगा जो मै
तुम उनको अपनी खुशबु से महकाते चलना

हु सर्द हवा का झोका जो
तुम बन खुशबु मुझे महकाते हमेशा मेरे साथ चलना

मै थक जाऊ कही ये वक़्त के थपडो से

शिथिल हो जाये मेरे अंग जो मन हार कर
आलिंगन कर मुझे बन सुधा मेरे मन मंदिर की
तुम अपने अधरों से मुझे जीवन पिलाते चलना

हु सर्द हवा का झोका जो मै
तुम बन खुशबु मुझे महकाते हमेशा मेरे साथ चलना

गर जो मेरे विचारो की ये धरा बन जाये
ये की नव विहान का मै सूरज अस्त हो जाये अगर
बन मेरी तुम किरण ले मेरे प्राणों की ज्वाला
ये धरा पर नित तुम उजालो को फैलाते रहना

हु सर्द हवा का झोका जो मै
तुम बन खुशबु मुझे महकाते हमेशा मेरे साथ चलना

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